Triyuginarayan Temple ki Jankari | त्रियुगीनारायण मंदिर की महत्ता

Triyuginarayan Temple ki Jankari. त्रियुगीनारायण मंदिर की महत्ता. मेरी आज की इस पोस्ट के द्वारा आप सभी को त्रियुगीनारायण मंदिर की जानकारी प्राप्त होने वाली है.

Feb 17, 2026 - 14:56
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Triyuginarayan Temple ki Jankari | त्रियुगीनारायण मंदिर की महत्ता
Triyuginarayan Temple ki Jankari

Triyuginarayan Temple ki Jankari | त्रियुगीनारायण मंदिर की महत्ता. मेरी आज की इस पोस्ट के द्वारा आप सभी को त्रियुगीनारायण मंदिर की जानकारी प्राप्त होने वाली है. त्रियुगीनारायण मंदिर शिव भगवान की वो यादगार जगह है जहा आप सभी लोगो को जरुर जाना चाहिए.  अपने इस आर्टिकल में आपको त्रियुगीनारायण मंदिर की सभी जानकारी मिलने वाली है. और आप लोग भी इस जानकारी को प्राप्त करके बहुत ही आराम से त्रियुगीनारायण मंदिर में जाकर दर्शन कर सकते हो.  

Triyuginarayan Temple ki Jankari

Triyuginarayan Temple ki Jankari 

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मोजूद त्रियुगीनारायण मंदिर एक हिन्दू मंदिर है. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. इस मंदिर Triyuginarayan Temple  में  गवान शिव ने भगवान विष्णु को साक्षी मानकर पार्वती से विवाह किया था। इसलिए इस स्थान को शिव पार्वती का विवाह स्थल के रूप में भी देखा जाता है. सभी शिव भक्तो के लिए है एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है. त्रियुगीनारायण मंदिर की विशेष विशेषता एक हमेशा जलती हुई अखंड ज्योति भी है. जो मंदिर के सामने हमेशा जलती रहती है. माना जाता है कि ज्योति दिव्य विवाह के समय से जलती आ रही है. जो आज भी त्रियुगीनारायण मंदिर में विराजमान है. इस ज्योति को अखंड धुनी भी बोला जाता है.

जो भी यात्री त्रियुगीनारायण मंदिर आते है वो इस हवनकुंड की राख को अपने साथ ले जाते है. त्रियुगीनारायण मंदिर के पुजारी रविग्राम नाम के गाव के जमलोकी ब्राहमण है. जो इस हवनकुण्ड की अग्नि को हमेशा जलाये रखते है. यह मंदिर भगवान् विष्णु के पाचवे अवतार के रूप में भी जाना जाता है. 

त्रियुगीनारायण मंदिर के सामने ब्रह्मशिला को दिव्य विवाह का वास्तविक स्थल माना जाता है। मन्दिर के अहाते में सरस्वती गङ्गा नाम की एक धारा का उद्गम हुआ है। यहीं से पास के सारे पवित्र सरोवर भरते हैं। सरोवरों के नाम रुद्रकुण्ड, विष्णुकुण्ड, ब्रह्मकुण्ड व सरस्वती कुण्ड हैं। रुद्रकुण्ड में स्नान, विष्णुकुण्ड में मार्जन, ब्रह्मकुण्ड में आचमन और सरस्वती कुण्ड में तर्पण किया जाता है।

त्रियुगीनारायण मंदिर केदारनाथ मंदिर की तरह ही दिखाई देता है. तो इसलिए शिव भगत अपनी केदारनाथ यात्रा के दोरान इस मंदिर तक जरुर जाते है. त्रियुगीनारायण मंदिर गौरीकुंड हाईवे पर सोनप्रयाग से 13 किमी की दूरी पर स्थित त्रियुगीनारायण का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां बारामास श्रद्धालु दर्शनों को पहुंचते हैं। साथ ही कई फिल्मी हस्तियां व टीवी सितारे यहाँ अपनी शादी करवा चुके है.  

क्या है त्रियुगीनारायण मंदिर की महत्ता

त्रियुगीनारायण मंदिर में तीन युगों पूर्व भगवान शिव व पार्वती की शादी हुई थी। इस देव विवाह की साक्षी सप्त वेदी अखंड ज्योति आज भी यहां अनवरत जल रही है। पर्वतराज हिमालय द्वारा अपनी पुत्री पार्वती के कन्यादान के प्रमाण यहां मौजूद हैं। मान्यता है कि भगवान शिव ने भगवान विष्णु को साक्षी मानकर पार्वती से विवाह किया था। इस विवाह की मूर्ति भी यहां मंदिर में मौजूद है। मंदिर में भगवान विष्णु वामन रूप में विराजमान हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर कैसे जाए

अगर आप त्रियुगीनारायण मंदिर जाना चाहते है तो सबसे पहले आपको सडक मार्ग से उत्तराखंड में मोजूद सोनप्रयाग पहुचना होगा. सोनप्रयाग केदारनाथ यात्रा का वो पहला पडाव है. जहा केदारनाथ धाम जाने वाले यात्री रुकते है. सोनप्रयाग पहुचने के बाद आपको सोनप्रयाग से ही 13 किलोमीटर की दुरी पूरी करके त्रियुगीनारायण मंदिर पहुच सकते है. Triyuginarayan Temple 12 महीने खुला रहता है. इसलिए आप Triyuginarayan Temple किसी भी महीने ओए किसी भी दिन जा सकते है. लेकिन जब केदारनाथ धाम के कपाट खुलते है. तो उस टाइम आपको त्रियुगीनारायण मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ मिलने वाली है. त्रियुगीनारायण मंदिर ऐसी जगह स्तिथ है जहा जाकर आपको मन की शांति मिलेगी.

और त्रियुगीनारायण मंदिर से ही आपको आसमान छुते केदारनाथ धाम के वो बर्फ के पहाड़ दिखाई देते है. जहा भोलेनाथ की नगरी है. त्रियुगीनारायण मंदिर आप अपनी गाडी या बस के द्वारा भी जा सकते हो. अगर आप बस के द्वारा त्रियुगीनारायण मंदिर जाना चाहते हो. तो सबसे पहले आपको हरिद्वार या ऋषिकेश से बस के द्वारा सोनप्रयाग जाना होगा. सोनप्रयाग जाने के बाद आपको त्रियुगीनारायण मंदिर के लिए टेक्सी मिल जाएगी. सोनप्रयाग से त्रियुगीनारायण मंदिर आपको टेक्सी के द्वारा ही जाना होगा.

तो अगर आप अपनी केदारनाथ धाम की यात्रा परे आ रहे है. तो शिव पार्वती के उस विवाह स्थल को जरुर देखिये. जहा शिव पार्वती ने साथ फेरे लिए थे. त्रियुगीनारायण मंदिर के लिए बस बुकिंग आप मेरे द्वारा भी करवा सकते हो. मुझे उम्मीद है मेरी इस Triyuginarayan Temple ki Jankari पोस्ट के द्वारा आपको त्रियुगीनारायण मंदिर से जुडी सभी जानकारी प्राप्त हो गयी होगी.    

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